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हनुमान जी के अदम्य पराक्रम का गान है सुंदरकांड, ,,गुरुजी अश्विन कुमार पाठक,,

*सुंदरकांड के पाठ और श्रवण से पापों का नाश होता है*

एडिटर/संपादक:- तनीश गुप्ता,खण्डवा

हनुमान जी के अदम्य पराक्रम का गान है सुंदरकांड, ,,गुरुजी अश्विन कुमार पाठक,,

*सुंदरकांड के पाठ और श्रवण से पापों का नाश होता है*

गुरु जी का दादाजी की नगरी में प्रथम आगमन पर समाजसेवियों ने किया स्वागत

खंडवा। अनाज मंडी प्रांगण में संगीतमय सुंदरकांड पाठ के लिए पधारें गुरुजी श्री अश्विन कुमार पाठक (अहमदाबाद) ने खण्डवा आगमन पर कहा कि सुंदरकांड के पाठ और श्रवण से पापों का नाश होता है तथा जीव भवसागर से पार हो जाता है। सुंदरकांड रामचरितमानस का हृदय है और हनुमानजी के अदम्य पराक्रम का गान है। सुंदरकांड एक प्रकार की तपस्या, योग एवं साधना है।
गुरुजी ने समझाते हुए कहा कि सुंदरकांड के अंतिम चरण में ‘सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुणगान, सादर सुनहि ते तरही भव सिंधु बिना जल जान” का तात्पर्य यही है कि इसे श्रद्धा से सुनने वाला कोई भी व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है, चाहे वह किसी भी धर्म, पंथ या संप्रदाय से जुड़ा हो, यहाँ तक कि अशिक्षित भी इससे लाभान्वित होते हैं।
समाज सेवी व प्रवक्ता सुनील जैन एवं नारायण बाहेती ने बताया कि सुंदर कांड पाठ का वाचन करने शनिवार दोपहर खंडवा पहुंचे गुरुजी का स्वागत लखनलाल नागौरी, आनंद नागौरी, संतोष नागोरी अखिलेश गुप्ता, नारायण बाहेती, सुनील जैन एवं परिवार जनों द्वारा किया गया। इस अवसर पर गुरु जी ने कहा कि हमारा देश धर्म और संस्कृति पर आधारित से देश है। कथाएं और पाठ हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं आज के इस कलयुग में थोड़ा भी समय धर्म के लिए निकाल लिया तो वह पुण्य प्राप्ती का साधन होता है। मोबाइल के इस युग में हम घंटो मोबाइल में उलझे रहते हैं लेकिन कुछ समय प्रभु दर्शन प्रभु की भक्ति और सत्संग के लिए नहीं निकाल पाते हैं यही दुख का कारण है। आज की युवा पीढ़ी को धर्म और संस्कृति के संस्कारों से जोड़ने की काफी आवश्यकता है। सुनील जैन ने बताया कि गुरुजी अश्विन कुमार पाठक जी 1 जून 2000 से प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ कर रहे हैं। गुजरात के भरूच जिले से 45 किमी दूर राजपारडी गांव के समीप नर्मदा तट पर उनकी गुरु गादी स्थित है। अब तक 9222 दिनों में वे 9382 बार सुंदरकांड पाठ कर चुके हैं। “जय श्रीराम सुंदरकांड परिवार” के साथ निःशुल्क पाठ करते हुए गुरुजी ने भारत के अनेक प्रांतों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, यूके और अफ्रीका के छोटे-बड़े शहरों में भी सुंदरकांड का पाठ किया है।

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